रविवार, 12 फरवरी 2012

आधुनिक अभिमन्यु (लघु कथा)

   
      ठाकुर साब के घर खुशियाँ मनाई जा रही थीं. उनकी पुत्रवधु की चौथी सन्तान जन्म लेने वाली थी. अल्ट्रासाउंड नामक महान तकनीकि द्वारा ज्ञात किया जा चुका था कि गर्भ में लड़का ही है. ठाकुर साब की तीनों पोतियाँ भी अपने भाई के आने को लेकर उत्साहित थीं. पूरे परिवार में उत्सव का माहौल था. इन सबके विपरीत ठाकुर साब  का भावी पोता अपनी  माँ के गर्भ में गंभीर चिन्तन में मग्न था. जिस प्रकार अभिमन्यु ने  अपनी माँ सुभद्रा  के गर्भ में रहते हुए पिता अर्जुन से चक्रव्यूह तोड़ने का अधूरा पाठ सुना था, उसी प्रकार ठाकुर साब का अजन्मा पोता भी अपने पिता द्वारा माँ को सुनाये गये वचन नौ महीने से  सुनता आया था. वह भली-भाँति जान गया था कि किस प्रकार लायक होते हुए भी उसके पिता ने आरक्षण नामक दैत्य के कारण पूरा जीवन धक्के खाए थे तथा अंत में नौकरी न मिलने पर परचून की दुकान लगाकर ही गुजर-बसर करना स्वीकार किया था. उसने अपने पिता के मुख से महंगाई व गरीबी नामक डायनों के अत्याचारों को भी खूब सुना व महसूस किया था. बालक ने पूरी रात सोचने के बाद एक निर्णय लिया और अगले दिन वह मृत  पैदा हुआ.  


***चित्र गूगल से साभार***

16 comments:

  1. उत्तर
    1. संतोष त्रिवेदी जी सिर्फ अफ़सोस मनाने से कुछ हो पाएगा?

      हटाएं
  2. उत्तर
    1. संगीता जी कुछ मत कहिए बस इस आरक्षण के विरुद्ध उठकर खड़ी हो जाइए...

      हटाएं
  3. कहने को कोई शब्‍द नहीं सूझ रहे.....

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. अतुल जी निशब्द मत होइए कुछ कहिए इस कुप्रथा के खिलाफ...

      हटाएं
  4. अभिमन्यु ने हार नहीं स्वीकार की थी वो तो लड़ते लड़ते वीर हुआ फिर आज ऐसा क्यों ....

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. आरक्षण के आगे आज के अभिमन्यु बिलकुल हताश हो गए हैं...

      हटाएं
  5. ये तो सिर्फ नाम का अभिमन्यु था, उस अभिमन्यु जैसी 'हिम्मत' और 'प्रतिभा' नहीं थी...अन्यथा ऐसा कदापि नहीं करता.

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  6. वर्तमान में हम लोगो ने जि‍तनी सफलता भ्रूण हत्‍या रोकने पर पा ली है उससे कही ज्‍यादा दुर्शशा आज आरक्षण ने कर दी है यही सि‍क्‍के के दो पहलू है। दोनो के लि‍ये हमी जि‍म्‍मेदार है।

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं

यहाँ तक आयें हैं तो कुछ न कुछ लिखें
अच्छा लगे अच्छा जो लगे बुरा तो बुरा लिखें.